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બુધવાર, 15 જૂન, 2011

गुरुवार से समग्र गुजरात में लगातार नवें वर्ष कन्या केळवणी और शाला प्रवेशोत्सव जनअभियान का प्रारंभ

गांधीनगर- मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुरुवार से 16-17-18 जून के तीन दिनों के दौरान समग्र प्रदेश में लगातार नवें वर्ष कन्या केळवणी और शाला प्रवेशोत्सव के जनअभियान प्रारंभ होने जा रहे हैं।
आने वाले कल के गुजरात को शिक्षित बनाने के लिए आधारभूत शिक्षा-प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता ज्यादा ऊंचाई पर ले जाने के लिए सरस्वती यात्रा का यह पुरुषार्थ राज्य सरकार का प्रशासन और समाज साथ मिलकर करेंगे।
गुजरात में सरकार संचालित 32,772 प्राथमिक शालाओं और 44 हजार आंगनबाडि़यों को शामिल करते हुए समग्र 18 हजार गांवों में तीन दिनों तक मुख्यमंत्री, समग्र मंत्रिमंडल और संसदीय सचिव, राज्य के मुख्य सचिव, तमाम सचिव, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही जिले के वरिष्ठ अधिकारी, पदाधिकारीगण और जनप्रतिनिधियों सहित टीम गुजरात के 22,110 महानुभाव रोजाना पांच शालाओं में जाएंगे और तीन दिनों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के ज्ञान यज्ञ का नेतृत्व करेंगे।
शहरी क्षेत्र के लिए प्राथमिक शिक्षा का जनअभियान 23, 24, 25 जून, 2011 को तीन दिनों के दौरान 159 नगरपालिकाओं और 8 महानगरों में आयोजित होगा। पिछले आठ वर्षों से कन्या केळवणी और शाला प्रवेशोत्सव के जनआंदोलन को अद्भुत सफलता हासिल हुई है। वर्ष 2001 की जनगणना की तुलना में वर्ष 2011 की जनगणना की केन्द्रीय रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में स्त्री साक्षरता की दर में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी और शाला छोड़कर जाने के ड्राप आउट रेश्यो में 29.77 प्रतिशत की कमी आई है। आज गुजरात में कक्षा एक से पांच में स्कूल छोड़ने वालों का प्रतिशत 100 में से केवल 2 बालक है। लेकिन यह दो बालक भी अपनी प्राथमिक शिक्षा हासिल करें, इसकी चिन्ता भी मुख्यमंत्री कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने प्राथमिक शालाओं के गुणात्मक बदलाव के लिए ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध करवाने का अभियान सफलतापूर्वक चलाया है। दस वर्ष में 1,21,358 जितने विद्या सहायकों की भर्ती की गई है। गत वर्ष जिन 5,000 शालाओं में कक्षा 8 शुरु हुई, उनमें गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के 10,000 प्रशिक्षित विद्या सहायकों की भर्ती पारदर्शिता से की। इस वर्ष और 6,500 शालाओं में कक्षा 8 शुरु की जाएगी, जिसके लिए अतिरिक्त 13,000 विद्या सहायकों की नियुक्ति हो रही है। राज्य में 75,748 नई कक्षाएं बनाई गई हैं और 50,914 स्वच्छता संकुलों की आवश्यक सुविधाएं खड़ी की गई हैं। आज गुजरात की 32,772 ग्राम्य प्राथमिक शालाओं में बिजली और पेयजल की सुविधा उपलब्ध है।
11 लाख कन्याओं को 1000 रुपये के विद्या लक्ष्मी बांड के रूप में 11 करोड़ का फंड गरीब परिवार की कन्याओं के लिए दिया गया है।
मुख्यमंत्री की कन्या केळवणी निधि के लिए जनता ने उत्साह से दान दिया है और इसमें 44 करोड़ का भंडार श्री मोदी ने उनको मिले उपहारों की नीलामी से हासिल किया है। समग्र देश में कन्या केळवणी की प्रतिबद्घता के कारण श्री मोदी ने गुजरात में कन्याओं के शिक्षा के लिए अनेक नए क्षितीज खोले हैं। गांवों की छोटी बालिकाएं और कन्याएं शिक्षा में तेजस्वी और यशस्वी बन रही है।
शिक्षा के स्वास्थ्य जांच, प्राथमिक शालाओं में मध्याह्न भोजन के लिए पोषक आहार के गुणात्मक परिणाम और आंगनवाडि़यों में बाल भोग जैसे पोषक आहार की आधुनिक पहल से अगली पीढ़ी का गुजरात कुपोषण से मुक्त हो, ऐसी प्रतिबद्घता के साथ जनशिक्षा के अभियान, शिक्षा संस्कार का नवीन सामाजिक प्रभाव खड़ा करेंगे। यह अभियान संपन्न होेने के बाद गुणोत्सव का अभियान, प्राथमिक शाला, शिक्षक और विद्यार्थी की गुणवत्ता में भी नई ऊंचाइयों के दर्शन करवाएगा। मुख्यमंत्री ने कन्या केळवणी और शाला प्रवेशोत्सव के इस विराट जनअभियान मंे अपना उत्तम योगदान देने के लिए शाला परिवार के सभी लोगों को एक भावनात्मक पत्र भी भेजा है।


राज्य में प्राथमिक शिक्षा को सार्वत्रिक और सर्वसमावेशक बनाने की दिशा में ठोस कदम ः कन्या केळवणी यात्रा और शाला प्रवेशोत्सव अभियान
प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम और गुणात्मक सुधार के उत्तम परिणामों से शिक्षा की कायापलट हुई
संकलन ः श्री भानुभाई दवे, सूचना विभाग, गांधीनगर

गांधीनगर- गुजरात बिल्कुल नए अभिगमों के साथ अनोखे अंदाज से विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसकी गति विश्व को हर पल प्रगति का अहसास कराती है। मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आधुनिक दर्शन में से प्रगट पंचामृत योजना 21वीं सदी के आधुनिकतम विकास की राह दिखलाती है। इस पंचामृत योजना में से एक ज्ञानशक्ति मानव जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है।
पूर्व के वर्षों में राज्य में प्राथमिक शालाओं की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन ज्यादातर कई गांवों में बालकों ने कभी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया था। कहीं-कहीं बच्चे शालाओं में शिक्षा अधुरी छोड़ देते थे। शालाओं में अनुपस्थित रहते थे। परिणामस्वरूप अनुतीर्ण होते थे। शाला छोड़ देने से शिक्षा में स्थगितता बढ़ जाती थी और ड्राप आउट रेट बढ़ता जा रहा था। इस प्रकार प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र में गुजरात ज्यादा अग्रिम पंक्ति में नहीं था।
किसी भी राज्य या राष्ट्र की प्रगति का मापदंड शिक्षा है। शिक्षा ही सर्वांगीण विकास का मुख्य आधार है। राज्य के सर्वांगीण विकास का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री के इस गहन चिन्तन में से ज्ञानशक्ति की पारसमणी प्रकट हुई। ज्ञान आधारित विश्व में गुजरात को उसकी शक्ति के दर्शन करवाने हैं, इस चिंता में मानवीय संवेदनाओं वाले मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षा के क्षेत्र में नई राह दिखलाई। मुख्यमंत्री ने राज्य में कन्या केळवणी को प्रोत्साहन देने के लिए भिक्षा में बेटियों को पढ़ाने का वचन मांगा।
इतना ही नहीं, उनको मिलने वाले भेंट, उपहारों में से मिलने वाली रकम सरकारी खजाने में जमा करवाई और उससे मिली रकम कन्या केळवणी में खर्च कर राज्य की उभरती पीढ़ी को देने वाले शिक्षा के महत्व को समझते हुए राज्य सरकार ने कन्या केळवणी रथयात्रा, शाला प्रवेशोत्सव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभियान लगातार नवें वर्ष शुरू किया। शिक्षा से कोई वंचित न रह जाए और कन्या केळवणी को गति मिले, इस शुभ उद्देश्य से भगीरथी प्रयत्न शुरू हुए। राज्य सरकार के सघन प्रयासों और प्रचंड जनसहयोग से समग्र प्राथमिक शिक्षा की कायापलट हुई।


कन्या केळवणी और शाला प्रवेशोत्सव ः
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में कन्या केळवणी के लिए, विशेष तौर पर समग्र राज्य में जिन तहसीलों में स्त्री साक्षरता की दर 35 प्रतिशत से कम है, ऐसी तहसीलों में कन्या केळवणी को प्रोत्साहन देने के लिए 2003-04 से अभियान तमाम जिलों में जून माह में चलाया जाता है। इस अभियान में मुख्यमंत्री, मंत्रिगण, संसदीय सचिव और उच्च अधिकारी कड़ी गर्मी में मौजूद रहकर कार्यक्रमों में सहभागी होते हैं।
कन्या केळवणी और शाला प्रवेश महोत्सव कार्यक्रमों की वजह से ः

प्राथमिक शाला में जाने वाले बालकों का ड्राप आउट रेट 2003-04 में कक्षा 1 से 5 में 17.83 प्रतिशत था, यह घटकर 2010-11 में 2.09 प्रतिशत हो गया है। कक्षा 1 से 7 में ड्राप आउट 28 प्रतिशत था जो घटकर 7.95 प्रतिशत हो गया है।
भारत की 2001 की जनगणना के मुताबिक भारत और गुजरात की स्त्री साक्षरता दर क्रमशः 53.70 और 57.80 प्रतिशत थी। कन्या केळवणी अभियान की वजह से यह 2011 में 65.45 प्रतिशत भारत में जबकि 70.73 प्रतिशत गुजरात में हो गई है। कन्या केळवणी और गुणोत्सव की वजह से गुजरात में स्त्री साक्षरता में 12.93 जितनी बढ़ोतरी हुई है। शाला में विद्यार्थियों का नामांकन शत-प्रतिशत पहुंचने वाला है।
कन्या केळवणी निधि ः
राज्य में कन्या शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री कन्या केळवणी निधि नामक अलग फंड बनाया गया है। इस निधि में मुख्यमंत्री को प्राप्त भेंट, उपहारों की बिक्री से हुई आय की रकम जमा कराई जाती है और दाताओं, सेवाभावी और सहयोगी संस्थाओं द्वारा दी गई दान की रकम से फंड एकत्रित किया जाता है। इस प्रकार कुल 44 करोड़ रुपये जितना फंड एकत्र हुआ है। कन्या केळवणी निधि के अंतर्गत 30 आर्थिक पिछड़ी तहसीलों की मेडिकल-इंजीनियरिंग में अध्ययनरत कन्याओं को कम्प्यूटर, कक्षा 11-12 में विज्ञान विषय में अध्ययनरत कन्याओं को कोचिंग क्लास, व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हासिल करने वाली कन्याओं को आर्थिक सहायता दी जाती है।
सिविल सर्विस परीक्षा के सिलसिले में स्पीपा में एडमिशन लेने वाली कन्याओं को 10 हजार रुपये की सहायता, एचएससी-एसएससी में राज्य की प्रत्येक तहसील में प्रथम तीन क्रमांक पर आने वाली कन्याओं को 5,000 रुपये का पुरस्कार तथा प्रत्येक तहसील में प्रथम तीन क्रमांक पर आने वाली विकलांग कन्याओं को 5,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाता है।
तिथी भोजन / सुखड़ी और दूध वितरण ः
मुख्यमंत्री की यह अपेक्षा भी है कि गांव के दाता और स्वैच्छिक संस्थाओं की ओर से शुभ अवसरों पर प्राथमिक शाला में अध्ययनरत बालकों को तिथी भोजन / सुखड़ी और दूध वितरण करना चाहिए जिससे बालकों को पोषण मिले और वह नियमित शाला में हाजिर रहकर अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सके।
प्राथमिक शिक्षा में स्वर्णिम गुजरात वर्ष में हासिल की गई उपलब्धियां ः
गुजरात की तमाम 32,772 शालाओं में विद्यार्थियों के लिए शुद्घ पेयजल की व्यवस्था की गई। शालाओं में विद्यार्थी सुविधापूर्ण अभ्यास कर सके और कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर जैसे साधनों का उपयोग कर सकें, इसके लिए विद्युतिकरण की सुविधा उपलब्ध करवाई है। शाला में कन्या केळवणी को प्रोत्साहन मिले और शालाओं में ज्यादा से ज्यादा कन्याएं जा सकें, इसके लिए छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग स्वच्छता संकुल तैयार किए गए हैं। राइट टू फ्री एंड कम्पलसरी एजुकेशन एक्ट के अमल का राज्य सरकार ने निर्णय लिया है। प्राथमिक शिक्षा को दो भागों में बांटा गया है।
प्राथमिक शिक्षा कक्षा 1 से 5 और उच्च प्राथमिक शिक्षा कक्षा 6 से 8। उच्च प्राथमिक विभाग के लिए प्रशिक्षु स्नातक की व्यवस्था की गई जिससे उच्च प्राथमिक शाला के बालकों को ज्यादा बेहतर रूप से गणित-विज्ञान और अंग्रेजी की शिक्षा प्राप्त हो सके। उच्च प्राथमिक विभागों 2010 में 5,000 जितनी शालाओं को अपग्रेड किया गया और 10,000 विद्या सहायकों की भर्ती केन्द्रीयकृत रूप से एक माह मंे की गई यह राज्य सरकार के गर्व की बात है। वर्ष 2011-12 के लिए 5,000 जितनी शालाओं में आचार्य का पद खड़ा किया जाएगा।
राज्य की प्राथमिक शालाओं में ः
1,21,358 विद्या सहायकों की भर्ती
75,748 कक्षाओं का निर्माण
50,914 स्वच्छता संकुलों का निर्माण
21,088 विज्ञान प्रयोगशाला की सुविधा
4,53,409 लकड़ी के बेंच कक्षा 5, 6, 7 के बालकों के लिए
1,35,660 को कम्प्यूटर उपलब्ध करवाए
32,772 शालाओं का विद्युतीकरण
32,772 शालाओं में पेयजल की सुविधा उपलब्ध करवाई
शालाओं को प्राप्त जनसहयोग ः

वर्ष नकद प्राप्त वस्तु का मूल्य कुल रकम
2006 5704317 40646752 46351069
2007 10310683 41002012 51312695
2008 6335979 66424668 72760647
2009 11061247 86044157 97105404
2010 12388776 908358822 103224598
विद्यालक्ष्मी योजना ः
स्त्री साक्षरता दर ऊंची लाने के लिए विद्यालक्ष्मी योजना शुरू की गई है। इस योजना में 35 प्रतिशत से नीचे स्त्री साक्षरता वाले गांव-शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को शामिल किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत कक्षा 1 में प्रवेश हासिल करने वाली कन्या को 1,000 रुपये का नर्मदा श्रीनिधि बॉण्ड प्रदान किया जाता है साथ ही कक्षा सातवीं तक पढ़ाई पूरी करने वाली कन्याओं को ब्याज समेत रकम चुकाई जाती है।
विद्यालक्ष्मी बॉण्ड ः

वर्ष लाभार्थी कन्याएं बॉण्ड की रकम रु. में
2006-07 1,16,300 116300000
2007-08 1,47,506 147506000
2008-09 1,28,757 128757000
2009-10 1,15,553 111553000
2010-11 1,04,319 104319000
गुणोत्सव ः
प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में कन्या केळवणी और शाला प्रवेशोत्सव के बेहतरीन परिणाम हासिल हुए हैं। शालाओं में पर्याप्त शिक्षक और भौतिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है। इससे प्राथमिक शिक्षा के विद्यार्थियों के पढ़ने-लिखने की गुणवत्ता में सुधार हो, इसके लिए गुणोत्सव का आयोजन किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और शिक्षा मंत्री रमणलाल वोरा, राज्य शिक्षा मंत्री जयसिंहजी चौहान और वसुबेन त्रिवेदी के मार्गदर्शन में कन्या केळवणी यात्रा और शाला प्रवेशोत्सव का सामाजिक चेतना अभियान लगातार नवें वर्ष आयोजित होगा।
मुख्यमंत्री श्री मोदी कहते हैं कि, गरीबी, लाचारी और बीमारी के खिलाफ लड़ने के लिए शिक्षा ही एकमात्र साधन है। गांव की स्थिति ऐसी बननी चाहिए कि शिक्षित बालक गांव के निरक्षर बुजुर्गों को भी साक्षर बनाएं।
मुख्यमंत्री के गहन चिन्तन को चरितार्थ करने के लिए हमें भी यथासंभव सहयोग देकर सामाजिक उत्थान में सहभागी बनना चाहिए। आइए, बालकों के स्मित को निहारते हुए निरंतर बहते शिक्षा विकास के प्रवाह में हम भी शामिल हों।

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